कोलार में दुकानों पर तोड़फोड़, बीजेपी अध्यक्ष के नाम पर धमकी: फर्जी कॉल से मचा हड़कंप, मामला पुलिस तक पहुंचा
भोपाल के कोलार क्षेत्र में बुधवार रात एक अजीबो-गरीब घटना ने हलचल मचा दी। कुछ लोगों ने कथित रूप से दुकानों में तोड़फोड़ की और...
भोपाल के कोलार क्षेत्र में बुधवार रात एक अजीबो-गरीब घटना ने हलचल मचा दी। कुछ लोगों ने कथित रूप से दुकानों में तोड़फोड़ की और दुकानदारों को बीजेपी जिला अध्यक्ष रविंद्र याति के नाम पर धमकियां दीं। बाद में जांच में पता चला कि धमकी देने वाला व्यक्ति खुद को याति बताकर फर्जी कॉल कर रहा था। इस मामले ने न केवल स्थानीय व्यापारियों में भय का माहौल पैदा किया बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है।
फर्जी कॉल से बिगड़ी छवि
बीजेपी जिला अध्यक्ष रविंद्र याति ने इस मामले में स्वयं थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और स्पष्ट किया कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। याति ने बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनका नाम लेकर दुकानदारों को देर रात कॉल की और दुकानों के प्लेटफॉर्म गिराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह फर्जीवाड़ा उनकी साख को धूमिल करने की साजिश है।
“किसी ने मेरा नाम लेकर व्यापारियों को डराया-धमकाया। इससे यह भ्रम फैल गया कि मैं इस तोड़फोड़ के पीछे हूं, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है,” — रविंद्र याति का बयान।
घटना कैसे हुई
यह घटना ललिता नगर, कोलार रोड की है, जहां बुधवार रात कुछ दुकानों के साइनबोर्ड और प्लेटफॉर्म तोड़े गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने हथियारों के साथ दुकानों पर हमला किया और खुद को बीजेपी नेता का आदमी बताकर धमकियां दीं। घटना के बाद स्थानीय व्यापारी दहशत में आ गए और पुलिस को सूचना दी।
कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी ने बताया कि सूचना मिलते ही उपनिरीक्षक जनार्दन मिश्रा मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को शांत कराया।
पुलिस की कार्रवाई
दुकानदार अशोक यादव की शिकायत पर पुलिस ने जांच की तो कई दुकानों के बोर्ड और संरचनाएं क्षतिग्रस्त पाई गईं। इसके बाद पुलिस ने आशीष मीना और टिंकू मीना के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 296, 351(2), 324(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्यों अहम है यह मामला
यह घटना स्थानीय राजनीति और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है। किसी राजनीतिक नेता के नाम का दुरुपयोग कर हिंसा या धमकी देना न केवल व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाता है बल्कि समाज में अविश्वास का माहौल भी बनाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में डिजिटल ट्रेसिंग और कॉल रिकॉर्ड के माध्यम से जांच तेज की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें।
