महाराष्ट्र में कोचिंग क्लासेस पर लगेगा लगाम, कौशल शिक्षा को बढ़ावा
महाराष्ट्र सरकार ने कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कौशल-आधारित शिक्षा को अनिवार्य करने के लिए विधेयक पेश करने की...

कोचिंग क्लासेस पर नए नियम
महाराष्ट्र सरकार निजी कोचिंग कक्षाओं को औपचारिक नियामक ढांचे के तहत लाने के उद्देश्य से एक नया विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस कदम से तेजी से बढ़ते कोचिंग क्षेत्र में निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है। स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा है कि प्रस्तावित कानून को राज्य विधानमंडल के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार निजी स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस पर प्रतिबंध जैसे उपाय भी लागू कर रही है।
नीति से प्रेरित कौशल-आधारित शिक्षा
महाराष्ट्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को पूरी तरह से अपना रहा है, जिसमें कौशल-आधारित और उद्योग-उन्मुख शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने व्यावहारिक सीखने और मातृभाषा में शिक्षा पर एनईपी के फोकस को रेखांकित किया। अब स्कूल और कॉलेज स्तर पर छात्रों के लिए कौशल-आधारित शिक्षा अनिवार्य है। इसमें नौकरी बाजार के लिए छात्रों को तैयार करने हेतु पाठ्यक्रम पूरा करने से पहले अनिवार्य व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल है।
उद्योगों से साझेदारी और अनुसंधान को प्रोत्साहन
राज्य सरकार छात्रों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण की सुविधा के लिए विभिन्न उद्योगों के साथ समझौते कर रही है। इस पहल का उद्देश्य रोजगार क्षमता को बढ़ाना और अकादमिक ज्ञान तथा उद्योग की मांगों के बीच की खाई को पाटना है। इसके अलावा, नवी मुंबई के प्रस्तावित एडू-सिटी में लगभग 50 विश्व-स्तरीय शीर्ष विश्वविद्यालयों द्वारा परिसर स्थापित किए जाने की संभावना है। सरकार उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान कर रही है।
आगे क्या देखें
निजी कोचिंग विनियमन विधेयक के विशिष्ट विवरणों पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। कौशल-आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल और उद्योग साझेदारी के कार्यान्वयन पर भी आगे विवरण की उम्मीद है।
