‘मछली परिवार’ को राहत: हाईकोर्ट ने भोपाल प्रशासन को शरिफ अहमद और उनकी पत्नी के बैंक खाते खोलने का आदेश दिया
हाईकोर्ट ने दी राहत, प्रशासन को फटकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को भोपाल प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया कि वे ‘मछली परिवार’ के वरिष्ठ...

हाईकोर्ट ने दी राहत, प्रशासन को फटकार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को भोपाल प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया कि वे ‘मछली परिवार’ के वरिष्ठ सदस्य शरिफ अहमद और उनकी पत्नी साजिदा बी के बैंक खाते तत्काल अनफ्रीज करें।
न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर दिया, जिसमें दंपती ने अपने खातों को फ्रीज किए जाने, हथियार लाइसेंस निलंबित करने, घर तोड़ने और ईमेल ब्लॉक करने की कार्रवाई को चुनौती दी थी।
“कोई आपराधिक मामला नहीं” – अदालत में प्रशासन की स्वीकारोक्ति
सुनवाई के दौरान अदालत ने 26 सितंबर को भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और डीसीपी (क्राइम ब्रांच) अखिल पटेल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए थे। दोनों अधिकारियों ने अदालत में यह स्वीकार किया कि शरिफ अहमद और उनकी पत्नी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
इसके आधार पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि “जब तक किसी व्यक्ति पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, तब तक उसके वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाना कानूनसम्मत नहीं हो सकता।” अदालत ने बैंक खातों को खोलने और आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालन की अनुमति देने का आदेश दिया।
प्रशासन का पक्ष: अवैध निर्माण पर हुई थी कार्रवाई
अधिकारियों ने अदालत में यह भी स्पष्ट किया कि हथाईखेड़ा डैम के पास 21 अगस्त 2025 को ‘मछली परिवार’ की कोठी को ध्वस्त करने की कार्रवाई कानून के तहत की गई थी।
कलेक्टर कार्यालय के अनुसार, यह संपत्ति करीब 15,000 वर्ग फुट सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई थी। प्रशासन ने कब्जा हटाने से पहले धारा 248 (मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता) के तहत नोटिस जारी किया था। परिवार ने कार्रवाई से पहले अपने सामान हटा लिए थे।
बैंक खाते क्यों फ्रीज किए गए थे?
अधिकारियों का कहना है कि परिवार के खातों में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पाए गए थे, जिनमें बड़ी रकम के ट्रांसफर शामिल थे। इसलिए, जांच पूरी होने तक बैंक खातों को अस्थायी रूप से फ्रीज किया गया था।
हालांकि, अदालत ने यह कहा कि जब तक इन लेनदेन से जुड़े अपराध के ठोस सबूत न हों, तब तक खातों पर रोक न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।
परिवार से जुड़े अन्य मामले
इससे पहले, भोपाल क्राइम ब्रांच ने 23 जुलाई 2025 को ‘मछली परिवार’ के दो सदस्यों — शहवार अहमद और उनके भतीजे यासीन अहमद — को गिरफ्तार किया था। दोनों पर नशीले पदार्थों की तस्करी, बलात्कार, मारपीट, रंगदारी और अवैध हथियार रखने के गंभीर आरोप हैं।
प्रशासन का कहना है कि परिवार के इन सदस्यों के आपराधिक इतिहास और वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान ही यह कार्रवाई की गई थी।
व्यापक असर और कानूनी संकेत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों के संतुलन पर महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।
भोपाल स्थित विधि विश्लेषक अधिवक्ता साकेत तिवारी कहते हैं, “अगर किसी व्यक्ति पर प्रत्यक्ष आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, तो उसके आर्थिक संसाधनों को जब्त या फ्रीज करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ का उल्लंघन माना जा सकता है।”
निष्कर्ष
हाईकोर्ट के इस आदेश ने ‘मछली परिवार’ को फिलहाल बड़ी राहत दी है, हालांकि अवैध निर्माण से जुड़ी जांच और आपराधिक मामलों की जांच आगे जारी रहेगी। यह मामला प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और नागरिक अधिकारों के बीच की सीमाओं को लेकर राज्य में एक अहम कानूनी बहस खड़ी करता है।
मुख्य संदेश:
भोपाल हाईकोर्ट का फैसला सिर्फ एक परिवार के बैंक खाते खोलने का आदेश नहीं, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
