मोदी ने रणनीतिक, आर्थिक संबंधों और वैश्विक साख को मजबूत करने के लिए यूरोपीय दौरे की शुरुआत की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की वैश्विक साख बढ़ाने और संबंधों को मजबूत करने के लिए फ्रांस और स्लोवाक गणराज्य के छह दिवसीय आधिकारिक दौरे...

शीर्ष सारांश
- क्या हुआ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस और स्लोवाक गणराज्य के छह दिवसीय आधिकारिक दौरे की शुरुआत की, जिसमें द्विपक्षीय बैठकें, एक जी7 शिखर सम्मेलन और प्रौद्योगिकी कार्यक्रम शामिल हैं।
- यह क्यों मायने रखता है: यह दौरा भारत की बढ़ती वैश्विक साख, ग्लोबल साउथ के लिए एक प्रमुख आवाज के रूप में इसकी भूमिका को उजागर करता है, और रणनीतिक, रक्षा एवं आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है।
- क्या बदलेगा: भारत रक्षा उत्पादन को मजबूत करना, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में तेजी लाना और खुद को एक प्रौद्योगिकी महाशक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है, जिससे नई आर्थिक संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
- कौन प्रभावित होगा: भारत, फ्रांस, स्लोवाकिया, यूरोपीय संघ, जी7 राष्ट्र, वैश्विक प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र और भारतीय डायस्पोरा इन राजनयिक और आर्थिक जुड़ावों से प्रभावित होंगे।
पीएम मोदी ने छह दिवसीय यूरोपीय राजनयिक अभियान की शुरुआत की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप के छह दिवसीय महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरे की शुरुआत की है, जिसमें फ्रांस और स्लोवाक गणराज्य में पड़ाव शामिल हैं। यह उच्च दांव वाला दौरा भारत की तेजी से बढ़ती वैश्विक साख और ग्लोबल साउथ के लिए एक प्रमुख आवाज के रूप में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। व्यापक राजनयिक एजेंडा मौजूदा रणनीतिक साझेदारियों को बढ़ाने और नए आर्थिक संबंध बनाने के लिए संरचित किया गया है, जिससे भारत को विश्व मंच पर प्रमुखता से स्थापित किया जा सके।
चार चरणों वाला यूरोपीय दौरा: मुख्य यात्रा कार्यक्रम का अनावरण
प्रधानमंत्री का बहु-शहर यात्रा कार्यक्रम सावधानीपूर्वक नियोजित किया गया है, जिसमें दो राष्ट्रों में द्विपक्षीय जुड़ाव और बहुपक्षीय मंच दोनों शामिल हैं।
पहला चरण: नाइस, फ्रांस - रणनीतिक संबंधों को गहरा करना
13 से 14 जून, 2026 तक, प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के नाइस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक के लिए हैं। उनकी चर्चाएं दोनों देशों के बीच नव-उन्नत विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा पर केंद्रित होंगी। इस चरण के दौरान एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन है। यह मंच यूरोपीय उद्यम पूंजी कोषों को भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का प्रदर्शन करेगा, जिससे तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
दूसरा चरण: ब्रातिस्लावा, स्लोवाकिया - एक ऐतिहासिक पहुंच
14 से 16 जून, 2026 के बीच, प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया के ब्रातिस्लावा का एक ऐतिहासिक दौरा करेंगे। यह 1993 में स्वतंत्रता के बाद से स्लोवाकिया में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री स्लोवाक प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता करेंगे और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मिलेंगे। चर्चाओं का लक्ष्य रक्षा, रेलवे विनिर्माण और ऑटोमोबाइल क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों का विस्तार करना है।
तीसरा चरण: एवियन, फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन - वैश्विक संवाद
16 से 17 जून, 2026 तक, प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के एवियन में प्रतिष्ठित जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह प्रभावशाली शिखर सम्मेलन में भारत का लगातार आठवां निमंत्रण है, जो उसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्थिति को उजागर करता है। वह आर्थिक विकास, अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों को संबोधित करने वाले हैं। शिखर सम्मेलन के इतर अन्य विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी निर्धारित हैं।
अंतिम चरण: पेरिस, फ्रांस - प्रौद्योगिकी और डायस्पोरा संपर्क
यह दौरा 18 जून, 2026 को फ्रांस के पेरिस में समाप्त होगा, जहां प्रधानमंत्री मोदी यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप प्रदर्शनी विवटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। वह एक मुख्य भाषण देने वाले हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री भारतीय डायस्पोरा के सदस्यों के साथ जुड़ेंगे, समुदाय के संबंधों को मजबूत करने और उनके योगदान को स्वीकार करने के लिए एक महत्वपूर्ण संबोधन देंगे।
भारत के यूरोपीय जुड़ाव के मुख्य फोकस क्षेत्र
यह दौरा रणनीतिक रूप से कई प्रमुख उद्देश्यों के इर्द-गिर्द तैयार किया गया है:
- रणनीतिक और रक्षा संबंध: एक प्राथमिक ध्यान रक्षा उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है, विशेष रूप से फ्रांस के साथ समुद्री सुरक्षा और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी में।
- भारत-यूरोपीय संघ एफटीए को बढ़ावा: स्लोवाकिया में पड़ाव का लाभ उठाते हुए, भारत का लक्ष्य लंबे समय से चल रहे भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में तेजी लाने के लिए व्यापक मध्य यूरोपीय समर्थन प्राप्त करना है।
- प्रौद्योगिकी केंद्र बनाना: भारत खुद को उद्यमिता, हरित ऊर्जा पहलों और सीमा-पार डिजिटल परिवर्तन के लिए एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है।
जी7 औद्योगिक राष्ट्रों को संबोधित करने और मध्य यूरोप में नए द्विपक्षीय संबंध स्थापित करके, नई दिल्ली पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों और उभरते प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच आर्थिक साझेदारियों को सक्रिय रूप से जोड़ रहा है।
आगे क्या देखना है
द्विपक्षीय चर्चाओं और जी7 विचार-विमर्श के परिणामों पर ठोस समझौतों के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी, विशेष रूप से रक्षा सह-उत्पादन और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की समय-सीमा के संबंध में। 'भारत इनोवेट्स' और विवटेक में शुरू किए गए सीमा-पार तकनीकी सहयोग में आगे के घटनाक्रम वैश्विक नवाचार परिदृश्य में भारत की भूमिका को परिभाषित करेंगे।
