ट्रंप ने की मोदी की तारीफ, जल्द हो सकता है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता; रूसी तेल पर छूट की समीक्षा जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना करीबी दोस्त बताते हुए जल्द ही भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की उम्मीद जताई है।

मुख्य बिंदु (Top Summary)
क्या हुआ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि जल्द ही भारत के साथ एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता होने की उम्मीद है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को एक करीबी दोस्त बताया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह घोषणा गहन व्यापार वार्ताओं और हाल ही में हुए एक समझौते के बाद आई है, जिसमें भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने के आधिकारिक वादे के बाद अमेरिका ने 25% अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) हटा दिया था।
क्या बदलाव होंगे: व्यापारिक स्थितियां बदल सकती हैं क्योंकि वाशिंगटन अस्थायी तेल आयात छूट की समीक्षा कर रहा है। इसके साथ ही, जबरन श्रम आयात नीतियों को लेकर भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं को चेतावनी दी गई है।
कौन प्रभावित होगा: इससे भारतीय निर्यातक, ऊर्जा क्षेत्र, वैश्विक तेल बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति निर्माता सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
भारत के साथ व्यापार समझौते पर ट्रंप आशावादी
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गहरा भरोसा जताया है कि वाशिंगटन और नई दिल्ली निकट भविष्य में एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देंगे। गुरुवार को बोलते हुए, ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक "अच्छा दोस्त" बताया और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में आए बड़े बदलाव को रेखांकित किया।
"वर्षों तक, भारत ने अमेरिका का फायदा उठाया। उन्होंने हमसे भारी शुल्क वसूला और बदले में कुछ नहीं दिया। अब यह बिल्कुल उलट है और हम भारत के साथ काफी मुनाफा कमा रहे हैं।"
हालिया यूएसटीआर शिष्टमंडल और जबरन श्रम पर चेतावनी
ये सकारात्मक टिप्पणियां यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के अधिकारियों द्वारा 1 जून से 4 जून तक नई दिल्ली की चार दिवसीय राजनयिक यात्रा के बाद आई हैं। इस द्विपक्षीय वार्ता में कई महत्वपूर्ण व्यापारिक मुद्दों को शामिल किया गया था, जिनमें शामिल हैं:
- बाजार पहुंच और आर्थिक सुरक्षा सहयोग
- गैर-टैरिफ बाधाएं और व्यापार सुगमता के उपाय
- सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और नियामक संरेखण
हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव अभी भी बना हुआ है। अमेरिका ने हाल ही में भारत, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान और ब्रिटेन सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं को जबरन श्रम (forced labor) से बने सामानों के आयात पर पर्याप्त रोक न लगाने के लिए चिह्नित किया है।
"जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने में हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों की विफलता अस्वीकार्य है। यह एक ऐसी स्थिति पैदा करता है जहां अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर एक असमान मैदान में प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है," अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जेमिसन ग्रीर ने कहा।
रूसी तेल छूट और टैरिफ की समीक्षा
यह व्यापार वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका उन चुनिंदा देशों को दी गई अस्थायी छूट का महत्वपूर्ण मूल्यांकन कर रहा है जो रूसी तेल खरीद रहे हैं। पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए शुरू में मार्च में लाई गई और दो बार बढ़ाई गई यह अस्थायी छूट 17 जून को समाप्त होने वाली है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कांग्रेस को पुष्टि की कि इस छूट को आगे बढ़ाने का कोई भी निर्णय अमेरिकी वित्त विभाग के अधीन होगा।
"हम इसे जल्द से जल्द समाप्त करना चाहते हैं क्योंकि हमारे देश की मूल नीति रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने की रही है," रुबियो ने कहा।
इससे पहले, ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद के जरिए यूक्रेन में रूस के युद्ध को वित्तपोषित करने का आरोप लगाते हुए भारतीय आयातों पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगा दिया था। व्हाइट हाउस के एक फैक्ट शीट के अनुसार, भारत द्वारा आधिकारिक तौर पर रूसी तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताने के बाद ट्रंप ने पिछले शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर इस 25% शुल्क को हटा दिया है।
आगे क्या होगा? (What to Watch Next)
विश्लेषकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या अमेरिकी वित्त विभाग रूसी तेल की अस्थायी छूट को 17 जून की समय सीमा से आगे बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, प्रत्याशित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अंतिम शर्तें यह स्पष्ट करेंगी कि दोनों देश जबरन श्रम नियमों और आयात शुल्क के मुद्दों को कैसे सुलझाते हैं।
