क्रूज पर प्रकोप के बावजूद हंटावायरस के इलाज की खोज में फंडिंग की अड़चनें बरकरार
हंटावायरस के टीकों और इलाज में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन हालिया प्रकोप के बावजूद क्लीनिकल ट्रायल के लिए फंडिंग जुटाना एक बड़ी चुनौती बना...

क्या हुआ: शोधकर्ताओं ने हंटावायरस के टीकों और इलाज में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन क्लीनिकल ट्रायल के लिए फंड जुटाने में वे संघर्ष कर रहे हैं।
यह क्यों मायने रखता है: हंटावायरस बेहद जानलेवा है और जलवायु परिवर्तन के कारण इंसानों और इसके वाहक चूहों के बीच संपर्क बढ़ सकता है।
लोगों के लिए क्या बदलेगा: 'टोसीलीजुमैब' जैसी दवाएं लोगों की जान बचा सकती हैं, लेकिन अभी इनकी उपलब्धता बहुत सीमित है।
कौन प्रभावित है: चिली और अर्जेंटीना के स्थानीय लोग, वैश्विक यात्री और दुर्लभ संक्रामक बीमारियों से लड़ने वाले शोधकर्ता।
शांत खतरा: एक जानलेवा वैश्विक बीमारी
एक क्रूज शिप पर चूहे जनित दुर्लभ लेकिन जानलेवा हंटावायरस के प्रकोप ने दुनिया भर में इसके प्रमाणित इलाज की कमी को उजागर कर दिया है। हालांकि यह कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन दशकों बाद भी इसके लिए कोई सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत टीका नहीं बन पाया है।
यह वायरस आमतौर पर तब फैलता है जब लोग चूहों के मलमूत्र के दूषित कणों में सांस लेते हैं। हालांकि, एंडीज वायरस वेरिएंट, जिसके कारण क्रूज पर संक्रमण फैला, इंसानों के बीच करीबी संपर्क से भी फैलने की अनूठी क्षमता रखता है।
हालांकि इसके मामले दुर्लभ हैं, लेकिन यह बेहद जानलेवा है। चिली के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस साल 42 मामलों में से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि अर्जेंटीना में जून 2025 से अब तक 102 मामलों में 32 मौतें दर्ज की गई हैं।
नई उम्मीद: मौजूदा दवाओं का नया इस्तेमाल
अर्जेंटीना के शोधकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या गठिया की दवा टोसीलीजुमैब (tocilizumab) हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम से लड़ सकती है। यह दवा फेफड़ों में पानी भरने से रोकने के लिए सूजक अणु आईएल-6 (IL-6) को दबाने का काम करती है।
'द लांसेट इंफेक्शियस डिजीज' में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि टोसीलीजुमैब दिए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती पांच में से चार मरीज ठीक हो गए। इसके विपरीत, जिन पांच योग्य मरीजों को यह दवा नहीं दी गई, उनकी मौत हो गई।
"मुझे उम्मीद है कि यह स्थिति हमें अपनी रिसर्च जारी रखने और स्वास्थ्य कर्मियों, समुदाय और आवश्यक संसाधनों के बीच सहयोग को मजबूत करने में मदद करेगी," - डॉ. फर्नांडो टोर्टोसा, अध्ययन के मुख्य लेखक।
एंटीबॉडी थेरेपी और वैक्सीन का विकास
वैज्ञानिक संक्रमण से उबर चुके लोगों से तैयार की गई क्लोन एंटीबॉडी का भी परीक्षण कर रहे हैं। चिली के नेतृत्व वाली एक टीम ने 2018 में जानवरों पर इस दृष्टिकोण को सफलतापूर्वक साबित किया था, लेकिन इंसानों पर परीक्षण शुरू होने से पहले ही कोरोना महामारी के कारण फंड अन्य कामों में डाइवर्ट कर दिया गया।
वैक्सीन के मोर्चे पर, अमेरिकी सेना के संक्रामक रोग चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के जय हूपर के नेतृत्व वाली टीम ने उम्मीद जगाई है। शुरुआती चरण के मानव परीक्षणों में उनके वैक्सीन उम्मीदवार ने सफलतापूर्वक एंटीबॉडी विकसित की हैं।
- टोसीलीजुमैब थेरेपी: गंभीर मामलों में सूजन और फेफड़ों में पानी जमा होने की समस्या को लक्षित करती है।
- क्लोन एंटीबॉडी: संक्रमण को बेअसर करने के लिए ठीक हुए मरीजों की प्रतिरक्षा का उपयोग करती है, जिसके इंसानी ट्रायल के लिए फंड मिलना अभी बाकी है।
- डीएनए टीके: शुरुआती चरण के ये टीके एंडीज वायरस के खिलाफ सफलतापूर्वक एंटीबॉडी बनाने में सक्षम हैं।
फंडिंग मिलना क्यों बनी हुई है एक बड़ी चुनौती?
क्लीनिकल स्तर पर उम्मीदें जगाने के बावजूद, शोधकर्ताओं की राह आसान नहीं है। इस वायरस के मामलों के रुक-रुक कर सामने आने के कारण दवा कंपनियां और सरकारें बड़े पैमाने पर सुरक्षा परीक्षणों के लिए फंड देने से कतरा रही हैं।
स्टैनफोर्ड मेडिकल सेंटर के शोधकर्ता डॉ. पॉल बॉलिकी बताते हैं कि प्रयोगशालाओं के पास दुर्लभ बीमारियों के इलाज को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं हैं। इसके अलावा, क्लीनिकल ट्रायल करना बेहद कठिन और अव्यावहारिक है क्योंकि यह अनुमान लगाना लगभग असंभव है कि कौन इस वायरस की चपेट में आएगा।
आगे क्या देखना होगा
शोधकर्ता अब इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या क्रूज शिप पर फैला यह संक्रमण वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों और दवा कंपनियों को नए निवेश के लिए प्रेरित करता है। भविष्य के अध्ययन टोसीलीजुमैब और क्लोन एंटीबॉडी थेरेपी के क्लीनिकल ट्रायल को बढ़ाने पर केंद्रित होंगे।
इसके अलावा, वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे अगले मौसमी प्रकोप से पहले वैक्सीन उम्मीदवारों को बड़े पैमाने पर मानव परीक्षणों के चरण तक ले जा सकेंगे।
