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भोपाल मेट्रो को हरी झंडी: सात साल के इंतज़ार के बाद शहर को मिली पहली मेट्रो सेवा

भोपाल के शहरी परिवहन इतिहास में शनिवार एक अहम दिन बनने जा रहा है। लंबे इंतज़ार के बाद भोपाल मेट्रो रेल परियोजना का औपचारिक उद्घाटन...

Dec 20
3 min read
भोपाल मेट्रो को हरी झंडी: सात साल के इंतज़ार के बाद शहर को मिली पहली मेट्रो सेवा

भोपाल के शहरी परिवहन इतिहास में शनिवार एक अहम दिन बनने जा रहा है। लंबे इंतज़ार के बाद भोपाल मेट्रो रेल परियोजना का औपचारिक उद्घाटन कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में होगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश पढ़कर सुनाया जाएगा, जो इस परियोजना के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करेगा। इसके बाद केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री मोहन यादव पहली मेट्रो ट्रेन को रवाना करेंगे।


21 दिसंबर से आम जनता के लिए शुरू होगी सेवा

भोपाल मेट्रो का 6.22 किलोमीटर लंबा प्राथमिक कॉरिडोर, जिसमें कुल आठ स्टेशन शामिल हैं, 21 दिसंबर से यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। लॉन्च की तैयारियों के चलते फिलहाल स्टेशनों पर आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। वाणिज्यिक परिचालन शुरू होते ही भोपालवासियों को पहली बार मेट्रो में सफर करने का मौका मिलेगा।


सात साल में पूरी हुई शुरुआती यात्रा

इस परियोजना की नींव 2018 में रखी गई थी, जबकि प्राथमिक कॉरिडोर का काम 2025 में पूरा हुआ। तकनीकी चुनौतियों, प्रशासनिक अड़चनों और कोविड-19 महामारी के कारण निर्माण की गति प्रभावित हुई, जिससे परियोजना तय समय से आगे बढ़ती चली गई।


लागत और कॉरिडोर का पूरा खाका

2015 में स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, मेट्रो के पहले चरण की अनुमानित लागत ₹6,941 करोड़ रखी गई थी।
पहले चरण में दो प्रमुख कॉरिडोर शामिल हैं—

  • ऑरेंज लाइन: करोंद से एम्स भोपाल तक, लंबाई 14.99 किमी

  • ब्लू लाइन: भदभदा से रतनगिरी तक, लंबाई 12.88 किमी

अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो के एलिवेटेड सेक्शन की लागत करीब ₹250 करोड़ प्रति किमी, जबकि अंडरग्राउंड सेक्शन की लागत लगभग ₹450 करोड़ प्रति किमी है।


बीआरटीएस से मेट्रो तक का सफर

भोपाल में मेट्रो के लिए पहला व्यवहार्यता सर्वे 2008 में हुआ था, जब शहर में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (BRTS) का निर्माण चल रहा था। जहां 26 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस कॉरिडोर पर लगभग ₹350 करोड़ खर्च हुए, वहीं मेट्रो परियोजना कहीं अधिक तकनीकी और महंगी साबित हुई।
इस दौरान परियोजना ने चार मुख्यमंत्रियों—बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान, कमलनाथ और मोहन यादव— के कार्यकाल देखे।


किराया और यात्रियों को राहत

मौजूदा चरण में मेट्रो किराया अधिकतम ₹40 तय किया गया है, जो पांच या उससे अधिक स्टेशनों की यात्रा पर लागू होगा। अधिकारियों का कहना है कि किफायती किराया यात्रियों को निजी वाहनों से मेट्रो की ओर आकर्षित करेगा।


शहर के लिए क्या बदलेगा

विशेषज्ञों के मुताबिक, मेट्रो सेवा से—

  • ट्रैफिक जाम में कमी आएगी

  • यात्रा समय घटेगा

  • प्रदूषण कम होगा

  • स्टेशनों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा

इस लॉन्च के साथ भोपाल, इंदौर के बाद मध्य प्रदेश का दूसरा शहर बन जाएगा, जहां मेट्रो रेल सेवा संचालित हो रही है।