राज्य कैबिनेट का बड़ा फैसला: अस्थायी स्वीकृत पद होंगे स्थायी, हजारों कर्मचारियों को राहत
राज्य सरकार ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए सरकारी विभागों में वर्षों से चले आ रहे अस्थायी स्वीकृत पदों को...

राज्य सरकार ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए सरकारी विभागों में वर्षों से चले आ रहे अस्थायी स्वीकृत पदों को स्थायी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और सरकारी सेवाओं में स्थिरता व पारदर्शिता बढ़ेगी।
सरकारी सेवाओं की संरचना में बड़ा बदलाव
उपमुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि अब तक राज्य में सरकारी पदों की करीब 10 अलग-अलग श्रेणियां थीं, जिन consider में नियमित, नियमितीकृत, संविदा, अंशकालिक और अन्य प्रकार के पद शामिल थे।
इन सभी को सरल बनाते हुए अब केवल पांच श्रेणियों में सीमित कर दिया गया है, ताकि कर्मचारियों को नियमों और सेवा शर्तों को समझने में आसानी हो और अनावश्यक भ्रम समाप्त हो।
अस्थायी और स्थायी पदों का भेद समाप्त
राज्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्रिपरिषद ने विभिन्न विभागों में स्वीकृत अस्थायी और स्थायी पदों के बीच का अंतर खत्म करने का निर्णय लिया है।
इसके तहत सेवा भर्ती नियमों (Service Recruitment Rules) में आवश्यक संशोधन कर मौजूदा स्वीकृत अस्थायी पदों को स्थायी पदों में बदला जाएगा।
साथ ही:
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चार्ज-लोड और कैजुअल स्थापना के सभी पदों को गैर-संख्यात्मक (Non-numerical) घोषित किया गया है।
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इन श्रेणियों में नए नियुक्तियों पर रोक लगाने की भी मंजूरी दी गई है।
सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक ढांचे को अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।
नर्मदा परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए राहत पैकेज
कैबिनेट ने ऊपरी नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बासनिया बहुउद्देशीय परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए 1,782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को भी मंजूरी दी।
यह पैकेज अनूपपुर, मंडला और डिंडौरी जिलों में जलभराव से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए दिया जाएगा।
ग्रामीण सड़कों और आधारभूत ढांचे पर जोर
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क एवं अधोसंरचना योजना के तहत 10 लाख रुपये या उससे अधिक लागत वाले कार्यों को स्वीकृति दी गई है।
इसके अंतर्गत:
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लगभग 3,810 विकास कार्य
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कुल लागत 693.76 करोड़ रुपये
में पूरे किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को विस्तार
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी।
इसके लिए 905.25 करोड़ रुपये के व्यय को भी स्वीकृत किया गया है। यह योजना युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में अहम मानी जाती है।
क्यों अहम हैं ये फैसले
विशेषज्ञों के अनुसार, अस्थायी पदों को स्थायी करना न सिर्फ कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि सरकारी विभागों में अनुभव और निरंतरता भी सुनिश्चित करेगा। वहीं, पुनर्वास पैकेज और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर निवेश से क्षेत्रीय विकास और सामाजिक संतुलन को मजबूती मिलेगी।
