भोपाल मेट्रो शुरू होने से पहले ‘लास्ट-माइल’ संकट: पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम ठप, कनेक्टिविटी पर सवाल
भोपाल में लंबे इंतज़ार के बाद मेट्रो सेवा के शुरू होने की घड़ी नज़दीक है, लेकिन इस आधुनिक परिवहन प्रणाली की सबसे अहम कड़ी—लास्ट-माइल कनेक्टिविटी—इस...

भोपाल में लंबे इंतज़ार के बाद मेट्रो सेवा के शुरू होने की घड़ी नज़दीक है, लेकिन इस आधुनिक परिवहन प्रणाली की सबसे अहम कड़ी—लास्ट-माइल कनेक्टिविटी—इस समय कमजोर नज़र आ रही है। जिस पब्लिक बाइक शेयरिंग (PBS) सिस्टम को मेट्रो का स्वाभाविक सहयोगी माना जा रहा था, वह फिलहाल केवल सीमित और अस्थायी व्यवस्था के तहत चल रहा है, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है।
क्यों अहम है पब्लिक बाइक शेयरिंग?
शहरों में मेट्रो की सफलता सिर्फ ट्रेनों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि यात्री स्टेशन से अपने घर, दफ्तर या बाज़ार तक कितनी आसानी से पहुंच पाते हैं। इसी ‘लास्ट-माइल’ दूरी को पाटने के लिए भोपाल में साइकिल और ई-बाइक आधारित PBS को स्मार्ट सिटी परियोजना का अहम हिस्सा बनाया गया था।
समस्या की जड़: ऑपरेटर के बिना सिस्टम
जानकारी के अनुसार, पब्लिक बाइक शेयरिंग का मौजूदा ठेका समाप्त हो चुका है और फिलहाल कोई स्थायी ऑपरेटर नियुक्त नहीं है। इसी कारण यह व्यवस्था ‘केयरटेकर मोड’ में चल रही है। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि मौजूदा हालात में मेट्रो के प्राथमिक कॉरिडोर के सभी आठ स्टेशनों पर साइकिल सुविधा भरोसेमंद विकल्प नहीं बन पाएगी।
बस सेवा भी सीमित, चुनौती और बढ़ी
स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शहर की बस सेवा—भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL)—इस समय अपनी कुल क्षमता के केवल एक-तिहाई स्तर पर संचालित हो रही है। ऐसे में मेट्रो से उतरने के बाद यात्रियों के पास न तो पर्याप्त बसें होंगी और न ही भरोसेमंद बाइक विकल्प।
विशेषज्ञों की चेतावनी
शहरी परिवहन विशेषज्ञ लगातार आगाह करते रहे हैं कि बिना मजबूत फीडर सेवाओं के मेट्रो नेटवर्क यात्रियों को आकर्षित नहीं कर पाता। अगर स्टेशन तक पहुंचना या स्टेशन से बाहर निकलना मुश्किल हुआ, तो लोग निजी वाहनों का ही सहारा लेंगे, जिससे मेट्रो का पर्यावरण-अनुकूल उद्देश्य भी प्रभावित होगा।
प्राधिकरण का पक्ष: समाधान पर काम जारी
भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSCDCL) की सीईओ अंजू अरुण कुमार ने कहा कि एकीकृत और बहु-माध्यम परिवहन शहर की प्राथमिकता है। उनके अनुसार,
मेट्रो संचालन एजेंसी मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है ताकि बस स्टॉप और PBS डॉकिंग स्टेशन मेट्रो स्टेशनों के आसपास बेहतर ढंग से जोड़े जा सकें। उद्देश्य यह है कि मौजूदा और भविष्य के सभी मेट्रो स्टॉप्स पर भरोसेमंद लास्ट-माइल सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
आगे क्या?
फिलहाल मेट्रो यात्री सेवा अपने तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू होगी, लेकिन बिना पूर्ण सहयोगी परिवहन तंत्र के। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से पब्लिक बाइक शेयरिंग को पुनर्जीवित करता है या कोई वैकल्पिक व्यवस्था खड़ी करता है। क्योंकि अगर लास्ट-माइल की यह कड़ी कमजोर रही, तो मेट्रो का पूरा लाभ शहरवासियों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
