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भोपाल में दो बांग्लादेशी नागरिकों पर फर्जी दस्तावेज़ बनवाकर भारतीय पहचान हासिल करने का मामला दर्ज, खुफिया एजेंसियाँ सतर्क

राजधानी में अवैध विदेशी नागरिकों द्वारा भारतीय दस्तावेज़ हासिल करने का एक और मामला सामने आया है। कोलार इलाके में किराए के मकान में रह...

Dec 11
4 min read
भोपाल में दो बांग्लादेशी नागरिकों पर फर्जी दस्तावेज़ बनवाकर भारतीय पहचान हासिल करने का मामला दर्ज, खुफिया एजेंसियाँ सतर्क

राजधानी में अवैध विदेशी नागरिकों द्वारा भारतीय दस्तावेज़ हासिल करने का एक और मामला सामने आया है। कोलार इलाके में किराए के मकान में रह रहे दो बांग्लादेशी नागरिकों — मोहम्मद मकबूल आलम और रेहान अंसारी — पर पुलिस ने फर्जी आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट बनवाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। दोनों वर्तमान में फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है।


खुफिया अलर्ट के बाद कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब खुफिया एजेंसी ने इन दोनों पर भारतीय पहचान दस्तावेज़ों की धोखाधड़ी का अलर्ट साझा किया।
भोपाल पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि जांच को गंभीरता से लेते हुए इसे एसीपी (चूनाभट्टी) अंजली रघुवंशी को सौंपा गया है।

आयुक्त के अनुसार,

“यदि दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो कार्रवाई तय है।”

यह स्पष्ट करता है कि पुलिस विभाग भी इस मामले में जवाबदेही की समीक्षा कर रहा है।


किराए के घर से लेकर पासपोर्ट तक—कैसे बना फर्जी पहचान का जाल

जांच में सामने आया कि आलम और अंसारी 2017 से कोलार रोड स्थित राजवैद्य कॉलोनी में किराए पर रह रहे थे। मकान मालकिन लक्ष्मी ठाकुर ने उन्हें अगस्त 2017 में 11 महीने का नोटरीकृत किरायानामा दिया था।

पांच से सात वर्षों तक उसी पते का इस्तेमाल करते हुए दोनों ने—

  • फर्जी आधार कार्ड,

  • मतदाता पहचान पत्र,

  • तथा बाद में भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया।

पहचान सत्यापन के दौरान पुलिस यह जांच नहीं कर पाई कि दस्तावेज़ किस आधार पर जारी किए गए थे। परिणामस्वरूप दोनों को भारतीय पासपोर्ट जारी कर दिया गया।


पासपोर्ट कार्यालय की रिपोर्ट से खुली पोल

14 नवंबर 2023 को पासपोर्ट कार्यालय ने आधिकारिक रूप से पुलिस को पत्र लिखकर बताया कि दोनों व्यक्ति बांग्लादेशी नागरिक हैं और उन्होंने भारतीय पासपोर्ट धोखे से प्राप्त किया है।

इसके बाद पुलिस ने जब पते की दोबारा जांच की, तो:

  • दोनों वहाँ मौजूद नहीं मिले,

  • उनके नाम दर्ज मोबाइल नंबर बंद थे।

जांच अधिकारी मानते हैं कि यह “पूर्व नियोजित पहचान फर्जीवाड़ा” का मामला है।


भोपाल का गलत उपयोग: खुफिया एजेंसियों की चेतावनी

केंद्रीय और राज्य स्तरीय खुफिया इकाइयों ने पिछले कुछ समय से चेतावनी दी है कि भोपाल विदेशी अपराधियों और संदिग्ध नेटवर्कों का पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है

पिछले तीन वर्षों में यहाँ से ऐसे कई आरोपी पकड़े जा चुके हैं, जिनका संबंध—

  • सीरिया-आधारित आतंकी समूहों,

  • जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB),

  • पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI),

  • हिज्ब-उत-तहरीर

जैसे संगठनों से होने का संदेह था।

सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि भोपाल में फर्जी दस्तावेज़ हासिल करने के लिए किरायानामा, स्थानीय सत्यापन और पुलिस जांच की कमज़ोरियों का उपयोग किया जा रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।


ऐसे ही पुराने मामले: पैटर्न हो रहा स्पष्ट

यह घटना कोई पहली नहीं है। शहर में पिछले वर्षों में कई मामलों ने इसी पैटर्न की ओर संकेत किया है:

अक्टूबर 2025

कोलार पुलिस ने पश्चिम बंगाल की निवासी आशा सिंह जाट को शादी के बाद फर्जी पारिवारिक विवरण देकर भारतीय पासपोर्ट बनवाने के आरोप में बुक किया।

जुलाई 2025

तालैया क्षेत्र में ‘नेहा’ नाम की पहचान उपयोग करते हुए एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया, जिसने आधार, राशन कार्ड और पासपोर्ट नकली दस्तावेज़ों से प्राप्त किए थे।

जून 2024

बांग्लादेशी नागरिक बिप्लब पाल ने ऐशबाग की एक मस्जिद के पते पर भारतीय पासपोर्ट बनवाया। बाद में पता चला कि पुलिस ने बिना मौके पर पहुँचे सत्यापन पूरा दिखा दिया था।

अबु सलेम प्रकरण (लगभग 16–17 वर्ष पहले)

गैंगस्टर अबु सलेम और अभिनेत्री मोनिका बेदी ने भी भोपाल से फर्जी पासपोर्ट बनवाए थे, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई थी।


राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह के मामलों का प्रभाव केवल दस्तावेज़ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है।

  • नकली पहचान आतंकी मॉड्यूल, तस्करी नेटवर्क, और अवैध गतिविधियों को छिपाने का साधन बन सकती है।

  • सुरक्षा एजेंसियों को असली पहचान का पता लगाने में वर्षों लग सकते हैं।

  • शहर की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल और पुलिस सत्यापन प्रक्रियाओं पर सवाल उठते हैं।

इस वजह से सुरक्षा एजेंसियाँ भोपाल को “संवेदनशील केंद्र” के रूप में लगातार मॉनिटर कर रही हैं।