सीनियर वकील की आत्महत्या मामले में बड़ा खुलासा: दो मोबाइल नंबरों पर एफआईआर, ‘डिजिटल अरेस्ट’ गैंग की करतूत ने ली जान
जहानगीराबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार वर्मा (68) की आत्महत्या मामले में पुलिस को जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। वर्मा को झूठे आरोपों...

जहानगीराबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार वर्मा (68) की आत्महत्या मामले में पुलिस को जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। वर्मा को झूठे आरोपों और फर्जी ‘डिजिटल अरेस्ट’ कॉल्स के जरिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया था। पुलिस ने दो मोबाइल नंबरों के उपयोगकर्ताओं के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रकरण दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
क्या है मामला?
भोपाल के बर्खेड़ी, जहानगीराबाद निवासी शिवकुमार वर्मा 24 नवंबर की रात अपने घर में फांसी लगाकर मृत पाए गए। घटना के वक्त उनकी पत्नी दिल्ली में बेटी के पास थीं और बेटा पुणे में रहता है। कमरे से बरामद सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि वे अपनी “देशद्रोही” और “एंटी-नेशनल” कहलाने की बदनामी सहन नहीं कर पा रहे—ये आरोप उन्हें फर्जी साइबर कॉल्स के जरिए लगाए गए थे।
वरिष्ठ वकील होने के बावजूद वे इन धमकियों के मनोवैज्ञानिक दबाव में आ गए, जिसका अंत उनकी मौत के रूप में हुआ।
कैसे दिया गया झांसा? ‘डिजिटल अरेस्ट’ का पूरा जाल
पुलिस जांच से पता चला कि 22 नवंबर से वर्मा को दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार व्हाट्सऐप कॉल्स और संदेश मिल रहे थे। इन कॉलर्स ने खुद को केंद्रीय एजेंसियों से जुड़ा दिखाते हुए दावा किया कि उनका बैंक खाता आतंकियों को फंडिंग में इस्तेमाल हुआ है।
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कॉलर्स ने फर्जी वारंट भेजे—एक NIA के नाम से, दूसरा सुप्रीम कोर्ट के नाम पर।
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चैट में उनसे बातचीत की गई और उन्हें डराया गया कि जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।
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पुलिस के अनुसार, यह पूरा तरीका ‘डिजिटल अरेस्ट’ मॉडस ऑपरेंडी है, जिसमें आरोपित को घंटों तक भयभीत कर उससे जानकारी या पैसे ऐंठने की कोशिश होती है।
जहानगीराबाद थाना प्रभारी मान सिंह चौधरी ने बताया कि, “असामियों ने पैसे नहीं मांगे, लेकिन उन्होंने धमकियों और नकली वारंट के जरिए मानसिक दबाव बनाया, जिससे पीड़ित पूरी तरह टूट गया।”
परिवार की पीड़ा: बेटी ने चेताया था, लेकिन…
वर्मा की बेटी ने पुलिस को बताया कि 23 नवंबर को पिता ने उन्हें कॉल्स के बारे में बताया था। उन्होंने समझाया कि ये सब धोखाधड़ी है और वे अपनी कानूनी समझ के कारण तुरंत पहचान लेंगे। लेकिन लगातार मिल रहीं धमकियों ने उन्हें भयभीत कर दिया और वे वास्तविकता और डर के बीच फर्क नहीं कर पाए।
दोनों मोबाइल नंबर असम में रजिस्टर्ड
तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने पाया कि दोनों मोबाइल नंबर असम में रजिस्टर्ड हैं। अब कॉल-डेटा रिकॉर्ड, डिजिटल फुटप्रिंट और संबंधित IP की जांच की जा रही है ताकि वास्तविक आरोपी तक पहुंचा जा सके।
कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी देश में तेजी से बढ़ रही है। साइबर अपराधी सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर नागरिकों को मानसिक रूप से तोड़ रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक और अकेले रहने वाले लोगों पर इसका प्रभाव ज्यादा होता है।
यह घटना साबित करती है कि
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साइबर जागरूकता की भारी कमी है
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कानून के जानकार लोग भी भ्रमित हो सकते हैं
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डिजिटल डराने-धमकाने के मामलों में त्वरित कार्रवाई जरूरी है
पुलिस की अगली कार्रवाई
जहानगीराबाद पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की मदद से दोनों नंबरों के उपयोगकर्ताओं का लोकेशन डेटा और नेटवर्क ट्रेल खंगाला जा रहा है।
पुलिस ने कहा कि, “असली आरोपी तक पहुंचना प्राथमिकता है। डिजिटल अपराध सीमाओं के पार भी हो सकते हैं, इसलिए जांच बहु-स्तरीय होगी।”
